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नमस्कार दोस्तों! कल हमने आपको मुलुंड के अमर नगर रूम विवाद में सुनीता कहार का पक्ष दिखाया था। लेकिन पत्रकारिता का यह नियम है कि किसी भी नतीजे पर पहुँचने से पहले दोनों पक्षों की बात सामने आनी चाहिए। आज हम आपको इस मामले का दूसरा पक्ष दिखाने जा रहे हैं, जो सीमा राकेश पांडे का है। सीमा पांडे ने पुलिस और अदालत के सामने कई ऐसे दस्तावेज़ और सबूत पेश किए हैं, जो इस पूरे मामले को एक नया मोड़ देते हैं।”
पॉइंट 1: कमरे की लीगल चेन और मालिकाना हक (Ownership Claim)
”सीमा पांडे के मुताबिक, वे इस संपत्ति (BMC 197, हरिओम मित्र मंडल चाल) की कानूनी तौर पर वास्तविक खरीदार हैं। दस्तावेज़ों के अनुसार, उन्होंने यह कमरा 16 दिसंबर 2013 को एक रजिस्टर्ड एग्रीमेंट के तहत मनीष कुमार सिंह से 11,00,000 रुपये का पूरा भुगतान (चेक और कैश के जरिए) करके खरीदा था। मनीष सिंह ने यह कमरा साल 2012 में आनंद कहार से खरीदा था। इस कानूनी खरीद के बाद से ही कमरे का बिजली बिल भी आधिकारिक रूप से सीमा पांडे के नाम पर ट्रांसफर हुआ और वे साल 2014 से लेकर मई 2026 तक वहाँ कानूनी रूप से रह रही थीं।”
पॉइंट 2: कोर्ट का फैसला और बीएमसी (BMC) की कार्रवाई
”सीमा पांडे का पक्ष इसलिए भी मजबूत नजर आता है क्योंकि सिटी सिविल कोर्ट (Suit No. 102778/2014) ने उनके पक्ष में कानूनी फैसला (डिक्री) सुनाया था। इसके अलावा, वर्तमान स्थिति की बात करें तो 28 मई 2026 को बीएमसी (BMC) के निर्देश और आदेश के बाद, सीमा पांडे ने वह रूम आधिकारिक तौर पर खाली कर दिया। इसके बदले में उन्हें बीएमसी की तरफ से कांजुरमार्ग स्थित बीएमसी बिल्डिंग (Room No. 1302, G-Wing) में वैकल्पिक सदनिका (Alternative Room) दी गई है.
पॉइंट 3: सुनीता कहार पर ‘दोहरी पहचान’ और धोखाधड़ी के आरोप
”दूसरे पक्ष का सबसे बड़ा और गंभीर दावा यह है कि कहार परिवार के पास दो अलग-अलग राज्यों की पहचान (Dual Identities) थी। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, रामनारायण कहार, सुनीता कहार और शिवकुमार कहार के पास साल 1992 से 2014 तक उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले का सक्रिय राशन कार्ड और वोटर आईडी कार्ड मौजूद था। लेकिन इसी दौरान, उन्होंने मुंबई, महाराष्ट्र का भी दूसरा राशन कार्ड बनवा रखा था। जब इस दोहरे राशन कार्ड के फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ, तो राशनिंग अथॉरिटी ने जांच के बाद उनके महाराष्ट्र वाले डुप्लीकेट राशन कार्ड को रद्द (Cancel) कर दिया था। सीमा पांडे का आरोप है कि कहार परिवार का इस कमरे से कोई वास्ता नहीं है और वे वास्तव में अंधेरी ईस्ट में रहते हैं।”
पॉइंट 4: कोर्ट केस और एफआईआर (FIR) की सच्चाई
”सीमा पांडे ने मुलुंड पुलिस को दिए अपने लिखित बयान में साफ किया है कि सुनीता कहार द्वारा उनके खिलाफ किए गए कई मामले (जैसे केस नंबर 2700010/2014) अदालत द्वारा पहले ही खारिज (Dismissed) किए जा चुके हैं। इसके साथ ही, बॉम्बे हाई कोर्ट और सेशंस कोर्ट ने भी विरोधी पक्ष द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों को पूरी तरह रद्द (Quash) कर दिया है। दूसरी तरफ, फर्जी दस्तावेज़ बनाने, जालसाजी और जबरन घुसने के आरोप में खुद सुनीता कहार और उनके सहयोगियों पर मुलुंड पुलिस स्टेशन में एफआईआर (जैसे FIR No. 01/2015 और 84/2015) दर्ज हैं।”
निष्कर्ष (Conclusion):
”4 जून 2026 को सीमा राकेश पांडे ने मुलुंड पुलिस स्टेशन में अपना लिखित बयान दर्ज कराया है। उनका कहना है कि सुनीता कहार हर कानूनी मोर्चे (बीएमसी, पुलिस और कोर्ट) पर केस हारने के बाद अब हताशा में आकर खुद को नुकसान पहुँचाने (Self-harm) या पांडे परिवार को किसी झूठे मामले में फंसाने की कोशिश कर सकती हैं, इसलिए उन्होंने पुलिस को पहले ही सतर्क कर दिया है। सीमा पांडे का मानना है कि यह पूरी तरह से एक सिविल विवाद है और अब सभी पक्षों को सिटी सिविल कोर्ट के अंतिम फैसले का सम्मान करना चाहिए।”
दोस्तों, यहाँ एक बात समझना बेहद जरूरी है कि हमारा कानून दोनों पक्षों को अपनी बात रखने का पूरा और बराबर मौका देता है। अगर सुनीता कहार के पास इस संपत्ति से जुड़े कोई भी पुख्ता या वैध कानूनी दस्तावेज़ मौजूद हैं, तो वे भी कानून के तहत अदालत में जाकर अपनी शिकायत दर्ज कराने या अपना पक्ष मजबूती से रखने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र हैं।
चूंकि यह पूरा मामला अभी सिटी सिविल कोर्ट के अधीन (Sub-judice) है, इसलिए अंतिम फैसला अदालत के सामने पेश किए गए सबूतों और गवाहों के आधार पर ही तय होगा। कानूनन जब तक कोर्ट का अंतिम फैसला नहीं आ जाता, तब तक किसी भी पक्ष को पूरी तरह सही या गलत नहीं ठहराया जा सकता। हमारा मकसद दोनों तरफ के दावों और दस्तावेज़ों को आपके सामने रखना है, ताकि आप इस विवाद के दोनों पहलुओं को समझ सकें।”

