
क्या गरीब होना सच में कोई पाप है?”
यह दर्द है कांजुरमार्ग के उस PAP (Project Affected People) रीसेटलमेंट का, जिसे देखकर लगता है कि हमें प्रोजेक्ट के तहत नहीं, बल्कि किसी ‘पाप’ की सजा के तौर पर ये घर दिए गए हैं। 1 जून से यहाँ लगभग 276 परिवारों को शिफ्ट किया गया है, और तब से लेकर आज तक हर कोई सिर्फ आंसू बहा रहा है।
दिखावे का पक्का मकान, अंदर से खंडहर:
- हर फ्लैट में भयंकर लीकेज है। कहीं फॉल्स सीलिंग से पानी टपक रहा है, कहीं बेसिन से बाढ़ आ रही है, तो कहीं दीवारों और टाइल्स के बीच से पानी रिस रहा है।
- स्थिति इतनी बदतर हो चुकी है कि लोग अब यहाँ से भागकर फिर से किराए के कमरों में रहने को मजबूर हो रहे हैं।
अधिकारी अनप्लांड शिफ्टिंग करके, हमें इस नरक में ढकेलकर अपना पल्ला झाड़ चुके हैं। कोई सुध लेने वाला नहीं है, कोई सुनने वाला नहीं है।
हम अमर नगर की झोपड़ियों में जरूर रहते थे, लेकिन वो झोपड़ी हमने अपने खून-पसीने की कमाई से, एक-एक ईंट जोड़कर स्वाभिमान के साथ बनाई थी। वहां छत टपकती भी थी, तो हमें मलाल नहीं था क्योंकि वो हमारी अपनी थी। यहाँ सरकार ने हमें पक्का मकान देने के नाम पर जो धोखा दिया है, उसने हमारा स्वाभिमान और चैन दोनों छीन लिया।
क्या विकास की कीमत सिर्फ गरीबों को अपना सब कुछ गंवाकर चुकानी पड़ेगी? इस अव्यवस्था के खिलाफ अब चुप बैठना मुमकिन नहीं है। अधिकारियों को जवाब देना ही होगा!
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